विश्व बाघ दिवस: बाघ संरक्षण में भारत बना दुनिया का अग्रणी देश

विश्व बाघ दिवस: बाघ संरक्षण में भारत बना दुनिया का अग्रणी देश

देश में 3,682 बाघ, विश्व के लगभग 70 प्रतिशत जंगली बाघों का भारत में बसेरा
रायपुर, 29 जुलाई 2026। विश्व बाघ दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने बाघों तथा उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण का संदेश देते हुए जनभागीदारी का आह्वान किया है। इस वर्ष का संदेश है—“बाघों की रक्षा, पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण।”
अखिल भारतीय बाघ आकलन–2022 के अनुसार देश में बाघों की अनुमानित संख्या 3,682 है। दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत जंगली बाघ भारत में पाए जाते हैं, जो वैश्विक बाघ संरक्षण में भारत की प्रभावी नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाता है।
देश में वर्तमान में 58 टाइगर रिजर्व हैं, जो 18 बाघ-बहुल राज्यों में विस्तारित हैं। भारत का संरक्षित टाइगर रिजर्व नेटवर्क लगभग 84,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। ये संरक्षित क्षेत्र केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों, जलस्रोतों, जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
बाघ खाद्य शृंखला के शीर्ष पर स्थित वन्यजीव है। किसी वन क्षेत्र में बाघ की उपस्थिति उस क्षेत्र के स्वस्थ जंगल, पर्याप्त शिकार आधार और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानी जाती है। इसलिए बाघ संरक्षण का अर्थ पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा है।
छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा बाघों एवं अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक निगरानी, कैमरा ट्रैप, गश्त, शिकार-रोधी कार्रवाई, वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा, आवास सुधार और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर विशेष बल दिया जा रहा है।
विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे वन्यजीव अपराधों की सूचना संबंधित वन अधिकारियों को दें, जंगलों और जलस्रोतों को स्वच्छ रखने में सहयोग करें तथा बाघ एवं जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाएं।